अलीगढ़, जेएनएन। पंचायत चुनाव में पुरुषों के साथ महिलाओं में भी उत्साह देखने को मिला। सुबह ही मतदान केंद्रों पर भीड़ लग गई। पुरुषों की संख्या सुबह ज्यादा थी। दोपहर में महिलाएं चौका-चूल्हे का काम खत्म कर वोट डालने पहुंचीं। कई बूथों पर तो पुरुषों से ज्यादा महिलाएं थीं। अधिकतर महिलाएं समूह बनाकर वोट डालने पहुंचीं। कड़ी धूप के बावजूद गांव की सरकार चुनने के लिए घंटों लाइन में खड़ी रहीं। जिले में कुल 18 लाख मतदाता हैं। इनमें आठ लाख से अधिक महिला मतदाता हैं। सुबह सात बजे मतदान शुरू हुआ। शुरुआत के दो घंटे पुरुष मतदाताओं के नाम रहे। युवा मतदाताओं में पहले वोट डालने की होड़ मची थी। केंद्रों पर पुरुष मतदाता ही नजर आ रहे थे। जैसे ही दिन चढ़ता गया, महिलाओं की संख्या बढ़ती गई। 11 से 12 बजे के बीच महिलाओं की संख्या बढऩे लगी। घर के काम निपटाकर महिलाएं वोट डालने पहुंचीं। दोपहर एक बजे तक अधिकतर बूथों पर महिलाओं की लंबी-लंबी लाइनें थीं। दर्जनों महिलाएं बूथ पर खड़े होकर बारी का इंतजार करती रहीं। शाहगढ़ का माडर्न प्राइमरी स्कूल हो या फिर भोजपुर का प्राथमिक विद्यालय, सभी जगह महिलाओं की भीड़ थी। कई बूथ ऐसे थे, जहां पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं की संख्या अधिक थी। कुछ महिलाएं टोलियां बनाकर वोट डालने पहुंचीं। इन महिलाओं को कहना था कि आपस में तय करके घर से निकली हैं कि किसे वोट देना है। सभी ने पढ़े-लिखे व विकास कराने वाले प्रत्याशी के नाम पर सहमति जताई। कई महिलाएं छोटे बच्चों को गोद में लेकर वोट डालने पहुंचीं।
अलीगढ़, जेएनएन। पंचायत चुनाव की मतदाता सूची में भी तमाम खामियां सामने आईं। किसी पंचायत में जिंदा लोगों के वोट गायब कर दिए गए तो कहीं मृतकों के नाम जोड़ दिए गए। कुछ लोगों के नाम व कुछ के पिता के नाम बदल दिए गए। मतदाता परेशान रहे। अकराबाद, खैर, टप्पल, धनीपुर ब्लाकों के कई बूथों पर इसे लेकर हंगामा भी हुआ। एजेंट व पीठासीन अधिकारियों में बहस हुई। तमाम लोग वोट डालने से रह गए। चुनाव में मतदाता सूची की अहम भूमिका रहती है। निर्वाचन आयोग महीनों पहले से तैयारी शुरू कर देता है। इस बार भी छह महीने पहले ही मतदाता सूची बनाने का काम शुरू हो गया। कोई मतदाता न रहे, इसके लिए डोर टू डोर अभियान चलाया गया। दावे व आपत्तियां मांगे गए, इसके बाद भी मतदाता सूची दुरुस्त नहीं हो सकीं। गुरुवार को मतदान के दिन सूचियों में खामियां सामने आईं। तमाम लोगों के नाम ही गायब थे। एक परिवार के वोटों को अलग-अलग वार्ड में कर दिया गया था। तमाम लोगों के नाम व पिता के नाम गलत थे। सैकड़ों मतदाता वोट नहीं डाले सके। कई गांवों से शिकायतें आईं कि जिनके नाम गलत दर्ज हैं, उन्हें पुलिसकर्मी मतदान केंद्र के अंदर प्रवेश नहीं दे रहे थे।
अलीगढ़, जेएनएन। एक से आठवीं तक के सरकारी स्कूलों में कोरोना संक्रमण बढऩे से अवकाश घोषित किया गया है। होली के अवकाश से शुरू हुआ छुट्टी का सिलसिला जारी है और 20 मई तक जारी रहेगा। विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए अभिभावकों को होमवर्क दिया जाएगा। बच्चे इसे घर पर पूरा करेंगे। बीएसए डा. लक्ष्मीकांत पांडेय ने बताया कि पिछले साल कोरोना काल में विद्यालय बंद थे, तब बच्चों को आनलाइन पढ़ाई में दिक्कतें आई थीं। ज्यादातर बच्चे ग्रामीण अंचल के होते हैं। उनके पास एंड्रायड मोबाइल या इंटरनेट की सुविधाएं या तो होती नहीं हैैं, या होते हुए भी वो उपयोग नहीं कर पाते हैं। पिछली बार भी करीब 30 से 40 हजार विद्यार्थी ही आनलाइन शिक्षा से जुड़ पाए थे। व्यवस्था की जा रही है कि बच्चों के अभिभावकों को सीमित संख्या में विद्यालय बुलाकर होमवर्क दिलवा दिया जाए। बच्चे घर पर उसे करेंगे तो पढ़ाई से जुड़े रहेंगे। फिर अभिभावक कोरोना गाइडलाइंस का पालन करते हुए होमवर्क को शिक्षक के पास लाकर जमा करेंगे और फिर नया होमवर्क दिया जाएगा। जो विद्यार्थी सक्षम हैं, उनको आनलाइन माध्यम से पढ़ाई कराई जाएगी।